लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिमि अरुनोपल निकर निहारी। धावहिं सठ खग मांस अहारी।।
मूल पाठ
जिमि अरुनोपल निकर निहारी। धावहिं सठ खग मांस अहारी।।
चोंच भंग दुख तिन्हहि न सूझा। तिमि धाए मनुजाद अबूझा।।
स्रोत अभिलेख 6.4 · पुस्तक पृ. 811, 812
भावार्थ
मूल पाठ के बादजैसे मूर्ख मांसाहारी पक्षी लाल पत्थरोंका समूह देखकर उसपर टूट पड़ते हैं, [पत्थरोंपर लगनेसे] चोंच टूटनेका दु:ख उन्हें नहीं सूझता, वैसे ही ये बेसमझ राक्षस दौड़े॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 812 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जिमि अरुनोपल निकर निहारी। धावहिं सठ खग मांस अहारी।।
English explanation
Just as foolish flesh-eating birds rush upon seeing a heap of red gems—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | just as |
| अरुनोपल | लाल मणियों का | of red gems |
| निकर | ढेर | heap |
| निहारी | देखकर | having seen |
| धावहिं | दौड़ पड़ते हैं | rush forward |
| सठ | मूर्ख | foolish |
| खग | पक्षी | birds |
| मांस | मांस | flesh |
| अहारी | खाने वाले | eating |
2 चोंच भंग दुख तिन्हहि न सूझा। तिमि धाए मनुजाद अबूझा।।
English explanation
They do not foresee the pain of their beaks breaking; likewise, the uncomprehending man-eating demons rushed forward.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चोंच | चोंच | beak |
| भंग | टूटने का | breaking |
| दुख | दुःख | pain |
| तिन्हहि | उन पक्षियों को | to those birds |
| न | नहीं | not |
| सूझा | सूझा, ध्यान में आया | occurred as a danger |
| तिमि | उसी प्रकार | likewise |
| धाए | दौड़ पड़े | rushed forward |
| मनुजाद | मनुष्यभक्षी राक्षस | man-eating demons |
| अबूझा | नासमझ | uncomprehending |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 812
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 811, 812
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