लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिं। देखहि तेहि न दुखित फिरि आवहिं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपर्वत और वृक्षोंको लेकर वानर आकाशमें दौड़कर जाते हैं। पर उसे देख नहीं पाते, इससे दुखी होकर लौट आते हैं—मेघनादने मायाके बलसे अटपटी घाटियों, रास्तों और पर्वत- कन्दराओंको बाणोंके पिंजरे बना दिये (बाणोंसे छा दिया)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 842 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिं। देखहि तेहि न दुखित फिरि आवहिं।।
अवघट घाट बाट गिरि कंदर। माया बल कीन्हेसि सर पंजर।।
स्रोत अभिलेख 6.73 · पुस्तक पृ. 842, 843
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिं। देखहि तेहि न दुखित फिरि आवहिं।।
English explanation
The monkeys rushed into the sky carrying mountains and trees; unable to see him, they returned distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहि | पकड़कर; लेकर | taking hold of |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| तरु | वृक्ष | trees |
| अकास | आकाश में | into the sky |
| कपि | वानर | the monkeys |
| धावहिं | दौड़ते हैं | rush |
| देखहि | देख पाते हैं | can see |
| तेहि | उसे; छिपे हुए आक्रमणकारी को | him, the hidden attacker |
| न | नहीं | not |
| दुखित | दुखी; व्यथित | distressed |
| फिरि | लौटकर | back |
| आवहिं | आते हैं | come |
2 अवघट घाट बाट गिरि कंदर। माया बल कीन्हेसि सर पंजर।।
English explanation
Through his power of illusion, he made a cage of arrows across difficult terrain, passes, paths, mountains, and caves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवघट | दुर्गम स्थान | difficult terrain |
| घाट | घाट; उतरने-चढ़ने के मार्ग | passes and approaches |
| बाट | रास्ते | paths |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| कंदर | गुफाएँ | caves |
| माया | माया; भ्रम रचने की शक्ति | illusion-making power |
| बल | के बल से | by the power of |
| कीन्हेसि | उसने बना दिया | he made |
| सर | बाणों का | of arrows |
| पंजर | पिंजरा | a cage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 842
- सहायक विषय
- मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
- मुद्रित पृष्ठ
- 842, 843
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।