लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दस दिसि रहे बान नभ छाई। मानहुँ मघा मेघ झरि लाई।।
मूल पाठ
दस दिसि रहे बान नभ छाई। मानहुँ मघा मेघ झरि लाई।।
धरु धरु मारु सुनिअ धुनि काना। जो मारइ तेहि कोउ न जाना।।
स्रोत अभिलेख 6.73 · पुस्तक पृ. 842, 843
भावार्थ
मूल पाठ के बादआकाशमें दसों दिशाओंमें बाण छा गये, मानो मघा नक्षत्रके बादलोंने झड़ी लगा दी हो। 'पकड़ो, पकड़ो, मारो ये शब्द कानोंसे सुनायी पड़ते हैं। पर जो मार रहा है उसे कोई नहीं जान पाता॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 842 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दस दिसि रहे बान नभ छाई। मानहुँ मघा मेघ झरि लाई।।
English explanation
Arrows filled the sky in all ten directions, as though the clouds of the Magha season had set off a continuous downpour.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दस | दसों | all ten |
| दिसि | दिशाओं में | in the directions |
| रहे | छाए हुए थे | remained spread |
| बान | बाण | arrows |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| छाई | छाकर | covering |
| मानहुँ | मानो | as though |
| मघा | मघा नक्षत्र के वर्षाकाल के | of the rainy period associated with Magha |
| मेघ | बादलों ने | the clouds |
| झरि | वर्षा की झड़ी | a continuous downpour |
| लाई | लगा दी हो | had set off |
2 धरु धरु मारु सुनिअ धुनि काना। जो मारइ तेहि कोउ न जाना।।
English explanation
Cries of ‘Seize him! Seize him! Strike!’ reached their ears, but no one could identify the attacker.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरु | पकड़ो! | seize him! |
| धरु | पकड़ो! | seize him! |
| मारु | मारो! | strike! |
| सुनिअ | सुनाई देती है | is heard |
| धुनि | आवाज | the cry |
| काना | कानों में | in the ears |
| जो | जो व्यक्ति | the one who |
| मारइ | मारता है | attacks |
| तेहि | उसे | him |
| कोउ | कोई | anyone |
| न | नहीं | not |
| जाना | जानता या पहचानता | knows or identifies |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 842
- सहायक विषय
- मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
- मुद्रित पृष्ठ
- 842, 843
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।