लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सक्ति सूल तरवारि कृपाना। अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना।।
मूल पाठ
सक्ति सूल तरवारि कृपाना। अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना।।
डारह परसु परिघ पाषाना। लागेउ बृष्टि करै बहु बाना।।
स्रोत अभिलेख 6.73 · पुस्तक पृ. 842, 843
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह शक्ति, शूल, तलवार, कृपाण आदि अस्त्र, शस्त्र एवं वज्र आदि बहुत-से आयुध चलाने तथा फरसे, परिघ, पत्थर आदि डालने और बहुत-से बाणोंकी वृष्टि करने लगा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 842 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सक्ति सूल तरवारि कृपाना। अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना।।
English explanation
Spears, spikes, swords, sabres, and various missiles, hand-held weapons, and thunderbolt-like arms were being hurled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सक्ति | शक्ति नामक भाला | a spear-like weapon |
| सूल | शूल; नुकीला आयुध | a spike or pointed weapon |
| तरवारि | तलवार | sword |
| कृपाना | कृपाण; तलवार | sabre |
| अस्त्र | फेंके या छोड़े जाने वाले आयुध | projectile weapons |
| सस्त्र | हाथ से चलाए जाने वाले हथियार | hand-held weapons |
| कुलिसायुध | वज्र जैसे आयुध | thunderbolt-like weapons |
| नाना | अनेक प्रकार के | of various kinds |
2 डारह परसु परिघ पाषाना। लागेउ बृष्टि करै बहु बाना।।
English explanation
Axes, iron bludgeons, and stones were being hurled; he began showering numerous arrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| डारह | फेंकते हैं | they hurl |
| परसु | परशु; युद्ध की कुल्हाड़ी | battle-axes |
| परिघ | लोहे के भारी डंडे | heavy iron bludgeons |
| पाषाना | पत्थर | stones |
| लागेउ | वह लगा | he began |
| बृष्टि | वर्षा | a shower |
| करै | करने | to make |
| बहु | बहुत-से | many |
| बाना | बाणों की | of arrows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 842
- सहायक विषय
- मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
- मुद्रित पृष्ठ
- 842, 843
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