लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
खैंचहिं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चित दए।।
मूल पाठ
खैंचहिं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चित दए।।
बहु भट बहहिं चढ़े खग जाहीं। जनु नावरि खेलहिं सरि माहीं।।
स्रोत अभिलेख 6.88 · पुस्तक पृ. 860, 861
भावार्थ
मूल पाठ के बादगीध आँतें खींच रहे हैं, मानो मछलीमार नदी-तटपरसे चित्त लगाये हुए (ध्यानस्थ होकर) बंसी खेल रहे हों (बंसीसे मछली पकड़ रहे हों)। बहुत-से योद्धा बहे जा रहे हैं और पक्षी उनपर चढ़े चले जा रहे हैं। मानो वे नदीमें नावरि (नौकाक्रीड़ा) खेल रहे हों॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 860 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 खैंचहिं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चित दए।।
English explanation
Vultures on the bank pull out intestines, as though intent on fishing with a line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खैंचहिं | खींचते हैं | pull out |
| गीध | गिद्ध | vultures |
| आँत | आँतें | intestines |
| तट | किनारे पर | on the bank |
| भए | स्थित हुए | positioned |
| जनु | मानो | as though |
| बंसी | मछली पकड़ने की बंसी | fishing line and hook |
| खेलत | मछली पकड़ते हों | were fishing |
| चित | ध्यान | attention |
| दए | दिए हुए; लगाकर | giving; concentrating |
2 बहु भट बहहिं चढ़े खग जाहीं। जनु नावरि खेलहिं सरि माहीं।।
English explanation
Many warriors’ bodies drift along, with birds riding upon them, as though boating on the river.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | बहुत-से | many |
| भट | योद्धाओं के शरीर | warriors’ bodies |
| बहहिं | बहते हैं | float downstream |
| चढ़े | उन पर चढ़े हुए | mounted on them |
| खग | पक्षी | birds |
| जाहीं | चले जाते हैं | go along |
| जनु | मानो | as though |
| नावरि | नाव | a boat |
| खेलहिं | विहार करते हों | were enjoying a ride |
| सरि | नदी | river |
| माहीं | में | in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.88
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 860
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 860, 861
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।