लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक कहहिं ऐसिउ सौंघाई। सठहु तुम्हार दरिद्र न जाई।।
मूल पाठ
एक कहहिं ऐसिउ सौंघाई। सठहु तुम्हार दरिद्र न जाई।।
कहँरत भट घायल तट गिरे। जहँ तहँ मनहुँ अर्धजल परे।।
स्रोत अभिलेख 6.88 · पुस्तक पृ. 860, 861
भावार्थ
मूल पाठ के बादएक (कोई) कहते हैं, अरे मूर्खो! ऐसी सस्ती (बहुतायत) है, फिर भी तुम्हारी दरिद्रता नहीं जाती? घायल योद्धा तटपर पड़े कराह रहे हैं, मानो जहाँ-तहाँ अर्धजल (वे व्यक्ति जो मरनेके समय आधे जलमें रखे जाते हैं) पड़े हों॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 860 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एक कहहिं ऐसिउ सौंघाई। सठहु तुम्हार दरिद्र न जाई।।
English explanation
Some say, ‘Even with such abundant, easily available food, fools, your poverty does not go away!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | कुछ पक्षी | some birds |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| ऐसिउ | ऐसी भी | even such |
| सौंघाई | सस्ताई; सहज उपलब्धता | cheapness; ready abundance |
| सठहु | अरे मूर्खो | you fools |
| तुम्हार | तुम्हारी | your |
| दरिद्र | दरिद्रता; अभाव | poverty; want |
| न | नहीं | not |
| जाई | दूर होती | goes away |
2 कहँरत भट घायल तट गिरे। जहँ तहँ मनहुँ अर्धजल परे।।
English explanation
Wounded warriors lie groaning on the bank, as though laid here and there half in the water to await death.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहँरत | कराहते हुए | groaning |
| भट | योद्धा | warriors |
| घायल | घायल | wounded |
| तट | किनारे पर | on the bank |
| गिरे | गिरे हुए | fallen |
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ; वहाँ | there |
| मनहुँ | मानो | as though |
| अर्धजल | आधे जल में रखे हुए | placed half in water |
| परे | पड़े हों | were lying |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.88
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 860
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 860, 861
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।