लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।।
मूल पाठ
कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।।
कीन्हि क्रिया प्रभु आयसु मानी। बिधिवत देस काल जियँ जानी।।
स्रोत अभिलेख 6.105 · पुस्तक पृ. 883, 883
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुने उनको कृपापूर्ण दृष्टिसे देखा [और कहा—] सब शोक त्यागकर रावणकी अन्त्येष्टि क्रिया करो। प्रभुकी आज्ञा मानकर और हृदयमें देश और कालका विचार करके विभीषणजीने विधिपूर्वक सब क्रिया की॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 883 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।।
English explanation
AI draft: Lord Rama looked upon Vibhishana compassionately and said, ‘Set aside all grief and perform the funeral rites.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृपादृष्टि | करुणा भरी दृष्टि से | with a compassionate gaze |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| ताहि | उन्हें, विभीषण को | him, Vibhishana |
| बिलोका | देखा | looked upon |
| करहु | करो | perform |
| क्रिया | अंतिम संस्कार | funeral rites |
| परिहरि | त्यागकर | setting aside |
| सब | सारा | all |
| सोका | शोक | grief |
2 कीन्हि क्रिया प्रभु आयसु मानी। बिधिवत देस काल जियँ जानी।।
English explanation
AI draft: Obeying Lord Rama’s instruction, Vibhishana duly performed the funeral rites, thoughtfully taking place and time into account.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्हि | किया | performed |
| क्रिया | अंतिम संस्कार | funeral rites |
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| आयसु | आदेश | instruction |
| मानी | मानकर | having obeyed |
| बिधिवत | विधि के अनुसार | according to prescribed procedure |
| देस | स्थान; स्थानीय परिस्थिति | place; local circumstances |
| काल | समय | time |
| जियँ | मन में | in his mind |
| जानी | समझकर; विचार करके | having understood; taking into account |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.105
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 883
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 883, 883
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।