लङ्काकाण्ड · दोहा 105 · दोहा
मंदोदरी आदि सब देइ तिलांजलि ताहि।
मंदोदरी आदि सब देइ तिलांजलि ताहि।
भवन गईं रघुपति गुन गन बरनत मन माहि॥ १०५॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.105 · पुस्तक पृ. 883, 883
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मंदोदरी आदि सब देइ तिलांजलि ताहि।
एआई-निर्मित भावार्थ: मंदोदरी आदि सभी स्त्रियाँ रावण को तिलांजलि देकर…
English explanation
AI-drafted meaning: Mandodari and all the other women, having offered a funeral libation to Ravana…
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंदोदरी | रावण की पत्नी मंदोदरी | Mandodari, Ravana’s wife |
| आदि | और अन्य | and the others |
| सब | सभी स्त्रियाँ | all the women |
| देइ | देकर | having offered |
| तिलांजलि | मृतक के लिए तिल-मिश्रित जल की अंतिम अर्पणा | a funeral offering of water mixed with sesame seeds |
| ताहि | उसे, अर्थात रावण को | to him, namely Ravana |
2भवन गईं रघुपति गुन गन बरनत मन माहि॥ १०५॥
एआई-निर्मित भावार्थ: वे मन में श्रीराम के अनेक गुणों का वर्णन करती हुई महल लौट गईं।
English explanation
AI-drafted meaning: They returned to the palace, recounting Lord Rama’s many virtues in their minds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भवन | महल को | to the palace |
| गईं | लौट गईं | returned |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी श्रीराम के | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| गुन | गुण | virtues |
| गन | समूह, अनेक | multitude; many |
| बरनत | वर्णन करती हुई | recounting |
| मन | मन | their minds |
| माहि | में | in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 105
- स्रोत अभिलेख
- 6.105
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 883, 883
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