लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउन्होंने भाईकी दशा देखकर दु:ख किया। तब प्रभु श्रीरामजीने छोटे भाईको आज्ञा दी [कि जाकर विभीषणको धैर्य बँधाओ]। लक्ष्मणजीने उन्हें बहुत प्रकारसे समझाया तब विभीषण प्रभुके पास लौट आये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 883 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा।।
लछिमन तेहि बहु बिधि समुझायो। बहुरि बिभीषन प्रभु पहिं आयो।।
स्रोत अभिलेख 6.105 · पुस्तक पृ. 883, 883
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा।।
English explanation
AI draft: Seeing his brother Ravana’s condition, Vibhishana grieved. Then Lord Rama gave an instruction to his younger brother Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंधु | अपने भाई रावण की | of his brother Ravana |
| दसा | दशा | condition |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| दुख | शोक | grief |
| कीन्हा | किया | felt; experienced |
| तब | तब | then |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| अनुजहि | अपने छोटे भाई लक्ष्मण को | to his younger brother Lakshmana |
| आयसु | आदेश | instruction |
| दीन्हा | दिया | gave |
2 लछिमन तेहि बहु बिधि समुझायो। बहुरि बिभीषन प्रभु पहिं आयो।।
English explanation
AI draft: Lakshmana counseled Vibhishana in many ways. Then Vibhishana came to Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण ने | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| तेहि | उन्हें, विभीषण को | him, Vibhishana |
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| समुझायो | समझाया; ढाढ़स दिया | counseled; consoled |
| बहुरि | फिर | then; again |
| बिभीषन | विभीषण | Vibhishana, Ravana’s brother |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama |
| पहिं | पास | to; near |
| आयो | आए | came |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.105
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 883
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 883, 883
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।