लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरि लोचन रघुपतिहि निहारी। प्रेम मगन सब भए सुखारी।।
मूल पाठ
भरि लोचन रघुपतिहि निहारी। प्रेम मगन सब भए सुखारी।।
रुदन करत देखीं सब नारी। गयउ बिभीषनु मन दुख भारी।।
स्रोत अभिलेख 6.105 · पुस्तक पृ. 883, 883
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे सभी श्रीरघुनाथजीको नेत्र भरकर निरखकर प्रेममग्र हो गये और अत्यन्त सुखी हुए। अपने घरकी सब स्त्रियोंको रोती हुई देखकर विभीषणजीके मनमें बड़ा भारी दु:ख हुआ और वे उनके पास गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 883 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भरि लोचन रघुपतिहि निहारी। प्रेम मगन सब भए सुखारी।।
English explanation
AI draft: Gazing fully upon Rama, lord of Raghu’s lineage, they all became absorbed in love and filled with happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरि | भरकर; जी भरकर | fully; to their heart’s content |
| लोचन | आँखें | eyes |
| रघुपतिहि | रघुकुल के स्वामी राम को | upon Rama, lord of Raghu’s lineage |
| निहारी | देखकर | having gazed |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मगन | मग्न | absorbed |
| सब | सभी | all |
| भए | हो गए | became |
| सुखारी | सुखी | happy |
2 रुदन करत देखीं सब नारी। गयउ बिभीषनु मन दुख भारी।।
English explanation
AI draft: Vibhishana went there and saw all the women weeping, with deep sorrow in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रुदन | रोना; विलाप | weeping; lamentation |
| करत | करती हुई | doing; engaged in |
| देखीं | देखा | saw |
| सब | सभी | all |
| नारी | स्त्रियों को | the women |
| गयउ | गए | went |
| बिभीषनु | रावण के भाई विभीषण | Vibhishana, Ravana’s brother |
| मन | मन में | in his heart |
| दुख | दुःख | sorrow |
| भारी | बहुत गहरा | deep; great |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.105
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 883
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 883, 883
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।