लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुंभकरन रन रंग बिरुद्धा। सन्मुख चला काल जनु क्रुद्धा।।
मूल पाठ
कुंभकरन रन रंग बिरुद्धा। सन्मुख चला काल जनु क्रुद्धा।।
कोटि कोटि कपि धरि धरि खाई। जनु टीड़ी गिरि गुहाँ समाई।।
स्रोत अभिलेख 6.67 · पुस्तक पृ. 836, 837
भावार्थ
मूल पाठ के बादरणके उत्साहमें कुम्भकर्ण विरुद्ध होकर [उनके] सामने ऐसा चला मानो क्रोधित होकर काल ही आ रहा हो। वह करोड़-करोड़ वानरोंको एक साथ पकड़-पकड़कर खाने लगा। [ वे उसके मुँहमें इस तरह घुसने लगे] मानो पर्वतकी गुफामें टिड्डियाँ समा रही हों॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 836 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कुंभकरन रन रंग बिरुद्धा। सन्मुख चला काल जनु क्रुद्धा।।
English explanation
AI draft: Kumbhakarna advanced to confront them in battle, like wrathful Death itself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुंभकरन | रावण का भाई कुंभकर्ण | Kumbhakarna, Ravana’s brother |
| रन | युद्ध | battle |
| रंग | भूमि; क्षेत्र | arena; field |
| बिरुद्धा | विरोध में खड़ा; मुकाबला करता | opposing; confronting |
| सन्मुख | सामने की ओर | directly toward them |
| चला | बढ़ा | advanced |
| काल | मृत्यु का साकार रूप | Death personified |
| जनु | मानो | as though |
| क्रुद्धा | क्रोधित | wrathful |
2 कोटि कोटि कपि धरि धरि खाई। जनु टीड़ी गिरि गुहाँ समाई।।
English explanation
He seizes and devours countless monkeys, as though locusts were disappearing into a mountain cave.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोटि | करोड़ों | millions upon millions |
| कोटि | करोड़ों; संख्या पर बल | millions more; emphasizing vast numbers |
| कपि | वानर | monkey warriors |
| धरि | पकड़कर | seizing |
| धरि | बार-बार पकड़कर | seizing repeatedly |
| खाई | खाता है | devours |
| जनु | मानो | as though |
| टीड़ी | टिड्डियाँ | locusts |
| गिरि | पर्वत | mountain |
| गुहाँ | गुफा में | into a cave |
| समाई | समा गईं | disappeared inside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.67
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 836
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 836, 837
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।