लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोटिन्ह गहि सरीर सन मर्दा। कोटिन्ह मीजि मिलव महि गर्दा।।
मूल पाठ
कोटिन्ह गहि सरीर सन मर्दा। कोटिन्ह मीजि मिलव महि गर्दा।।
मुख नासा श्रवनन्हि कीं बाटा। निसरि पराहिं भालु कपि ठाटा।।
स्रोत अभिलेख 6.67 · पुस्तक पृ. 836, 837
भावार्थ
मूल पाठ के बादकरोड़ों (वानरों)-को पकड़कर उसने शरीरसे मसल डाला। करोड़ोंको हाथोंसे मलकर पृथ्वीकी धूलमें मिला दिया। [पेटमें गये हुए] भालू और वानरोंके ठट्ट-के-ठट्ट उसके मुख, नाक और कानोंकी राहसे निकल-निकलकर भाग रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 836 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कोटिन्ह गहि सरीर सन मर्दा। कोटिन्ह मीजि मिलव महि गर्दा।।
English explanation
He catches millions and crushes them against his body, and grinds millions more into the dust of the earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोटिन्ह | करोड़ों को | millions of them |
| गहि | पकड़कर | having seized |
| सरीर | अपने शरीर | his own body |
| सन | से; के सहारे | with; against |
| मर्दा | कुचलता है | crushes |
| कोटिन्ह | करोड़ों को | millions more |
| मीजि | मसलकर | having ground down |
| मिलव | मिला देता है | mixes into |
| महि | पृथ्वी की | of the earth |
| गर्दा | धूल | dust |
2 मुख नासा श्रवनन्हि कीं बाटा। निसरि पराहिं भालु कपि ठाटा।।
English explanation
Crowds of bears and monkeys emerge through his mouth, nose, and ears and flee.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुख | मुँह | mouth |
| नासा | नाक | nose |
| श्रवनन्हि | कानों | ears |
| कीं | के; की | of |
| बाटा | रास्तों से | through the passages |
| निसरि | निकलकर | emerging |
| पराहिं | भागते हैं | flee |
| भालु | भालू योद्धा | bear warriors |
| कपि | वानर योद्धा | monkey warriors |
| ठाटा | झुंड; समूह | crowds; bands |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.67
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 836
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 836, 837
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।