लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कपि लंगूर बिपुल नभ छाए। मनहुँ इंद्रधनु उए सुहाए।।
मूल पाठ
कपि लंगूर बिपुल नभ छाए। मनहुँ इंद्रधनु उए सुहाए।।
उठइ धूरि मानहुँ जलधारा। बान बुंद भै बृष्टि अपारा।।
स्रोत अभिलेख 6.87 · पुस्तक पृ. 859, 859
भावार्थ
मूल पाठ के बादवानरोंकी बहुत-सी पूँछें आकाशमें छायी हुई हैं। [वे ऐसी शोभा दे रही हैं] मानो सुन्दर इन्द्रधनुष उदय हुए हों। धूल ऐसी उठ रही है मानो जलकी धारा हो। बाणरूपी बूँदोंकी अपार वृष्टि हुई॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 859 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कपि लंगूर बिपुल नभ छाए। मनहुँ इंद्रधनु उए सुहाए।।
English explanation
Countless monkeys and langurs filled the sky, as though lovely rainbows had appeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपि | वानर | monkeys |
| लंगूर | लंगूर | langurs |
| बिपुल | बहुत बड़ी संख्या में | in great numbers |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| छाए | छा गए | spread across; filled |
| मनहुँ | मानो | as though |
| इंद्रधनु | इंद्रधनुष | rainbows |
| उए | उदित हुए; प्रकट हुए | arose; appeared |
| सुहाए | सुंदर | lovely |
2 उठइ धूरि मानहुँ जलधारा। बान बुंद भै बृष्टि अपारा।।
English explanation
Dust rises as though it were a stream of water; arrows become droplets in an immense downpour.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उठइ | उठती है | rises |
| धूरि | धूल | dust |
| मानहुँ | मानो | as though |
| जलधारा | जल की धारा | a stream of water |
| बान | बाण | arrows |
| बुंद | बूँदें | droplets |
| भै | हुई; बन गई | became; occurred |
| बृष्टि | वर्षा | rain; downpour |
| अपारा | अपार; अत्यधिक | immense |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.87
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 859
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 859, 859
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।