लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उमा राम की भृकुटि बिलासा। होइ बिस्व पुनि पावइ नासा।।
मूल पाठ
उमा राम की भृकुटि बिलासा। होइ बिस्व पुनि पावइ नासा।।
तृन ते कुलिस कुलिस तृन करई। तासु दूत पन कहु किमि टरई।।
स्रोत अभिलेख 6.35 · पुस्तक पृ. 805, 807
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[शिवजी कहते हैं—] हे उमा! जिन श्रीरामचन्द्रजीके भ्रूविलास (भौंहके इशारे)- से विश्व उत्पन्न होता है और फिर नाशको प्राप्त होता है; जो तृणको वज्र और वज्रको तृण बना देते हैं (अत्यन्त निर्बलको महान् प्रबल और महान् प्रबलको अत्यन्त निर्बल कर देते हैं), उनके दूतका प्रण, कहो, कैसे टल सकता है?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 806 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 उमा राम की भृकुटि बिलासा। होइ बिस्व पुनि पावइ नासा।।
English explanation
O Uma, through the movement of Rama’s brow, the universe comes into being and then meets destruction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| राम | राम | Rama |
| की | की | of |
| भृकुटि | भौंहों की | of the brow |
| बिलासा | चेष्टा से | through its movement |
| होइ | उत्पन्न होता है | comes into being |
| बिस्व | विश्व | the universe |
| पुनि | फिर | then |
| पावइ | प्राप्त करता है | undergoes |
| नासा | नाश | destruction |
2 तृन ते कुलिस कुलिस तृन करई। तासु दूत पन कहु किमि टरई।।
English explanation
He turns a blade of grass into a thunderbolt and a thunderbolt into grass. Tell me, how could his messenger’s pledge fail?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तृन | तिनके | a blade of grass |
| ते | से | from |
| कुलिस | वज्र | a thunderbolt |
| कुलिस | वज्र को | a thunderbolt |
| तृन | तिनका | a blade of grass |
| करई | कर देते हैं | he makes |
| तासु | उनके | his |
| दूत | दूत की | messenger’s |
| पन | प्रतिज्ञा | pledge |
| कहु | बताओ | tell me |
| किमि | कैसे | how |
| टरई | टल सकती है | could fail |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 806
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 805, 807
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।