लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि कपि कही नीति बिधि नाना। मान न ताहि कालु निअराना।।
मूल पाठ
पुनि कपि कही नीति बिधि नाना। मान न ताहि कालु निअराना।।
रिपु मद मथि प्रभु सुजसु सुनायो। यह कहि चल्यो बालि नृप जायो।।
स्रोत अभिलेख 6.35 · पुस्तक पृ. 805, 807
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर अंगदने अनेकों प्रकारसे नीति कही। पर रावणने नहीं माना; क्योंकि उसका काल निकट आ गया था। शत्रुके गर्वको चूर करके अंगदने उसको प्रभु श्रीरामचन्द्रजीका सुयश सुनाया और फिर वह राजा बालिका पुत्र यह कहकर चल दिया—॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 806 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुनि कपि कही नीति बिधि नाना। मान न ताहि कालु निअराना।।
English explanation
Angada then offered sound counsel in many ways, but Ravana would not heed it; his death had drawn near.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| कपि | वानर अंगद ने | Angada, the monkey warrior |
| कही | कहीं | spoke |
| नीति | नीति की बातें | sound counsel |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| नाना | अनेक | many |
| मान | मानता है | heeds |
| न | नहीं | not |
| ताहि | उसकी ओर; उसके लिए | for him |
| कालु | मृत्यु | death |
| निअराना | निकट आ गई थी | had drawn near |
2 रिपु मद मथि प्रभु सुजसु सुनायो। यह कहि चल्यो बालि नृप जायो।।
English explanation
Crushing the enemy’s pride, Angada proclaimed Lord Rama’s noble glory. Speaking the following words, the son of King Bali departed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिपु | शत्रु का | the enemy’s |
| मद | अहंकार | pride |
| मथि | चूर करके | crushing |
| प्रभु | प्रभु राम का | Lord Rama’s |
| सुजसु | उत्तम यश | noble glory |
| सुनायो | सुनाया | proclaimed |
| यह | यह | this |
| कहि | कहकर | having said |
| चल्यो | चल पड़ा | departed |
| बालि | बालि | Bali |
| नृप | राजा के | the king’s |
| जायो | जन्मे पुत्र | born son |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 806
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 805, 807
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।