लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिंघासन बैठेउ सिर नाई। मानहुँ संपति सकल गँवाई।।
मूल पाठ
सिंघासन बैठेउ सिर नाई। मानहुँ संपति सकल गँवाई।।
जगदातमा प्रानपति रामा। तासु बिमुख किमि लह बिश्रामा।।
स्रोत अभिलेख 6.35 · पुस्तक पृ. 805, 807
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह सिर नीचा करके सिंहासनपर जा बैठा। मानो सारी सम्पत्ति गँवाकर बैठा हो। श्रीरामचन्द्रजी जगत्भरके आत्मा और प्राणोंके स्वामी हैं। उनसे विमुख रहनेवाला शान्ति कैसे पा सकता है?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 806 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सिंघासन बैठेउ सिर नाई। मानहुँ संपति सकल गँवाई।।
English explanation
He sat on his throne with his head bowed, as though he had lost all his wealth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिंघासन | सिंहासन पर | on the throne |
| बैठेउ | बैठ गया | sat down |
| सिर | सिर | head |
| नाई | झुकाकर | bowing |
| मानहुँ | मानो | as though |
| संपति | संपत्ति | wealth |
| सकल | सारी | all |
| गँवाई | गँवा दी हो | had lost |
2 जगदातमा प्रानपति रामा। तासु बिमुख किमि लह बिश्रामा।।
English explanation
Rama is the soul of the world and the lord of life. How can anyone who turns away from him find peace?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगदातमा | जगत की आत्मा | the soul of the world |
| प्रानपति | प्राणों के स्वामी | lord of life |
| रामा | राम | Rama |
| तासु | उनसे | from him |
| बिमुख | विमुख व्यक्ति | one who turns away |
| किमि | कैसे | how |
| लह | पा सकता है | can attain |
| बिश्रामा | शांति | peace |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 806
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 805, 807
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।