लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गहसि न राम चरन सठ जाई। सुनत फिरा मन अति सकुचाई।।
मूल पाठ
गहसि न राम चरन सठ जाई। सुनत फिरा मन अति सकुचाई।।
भयउ तेजहत श्री सब गई। मध्य दिवस जिमि ससि सोहई।।
स्रोत अभिलेख 6.35 · पुस्तक पृ. 805, 807
भावार्थ
मूल पाठ के बादअरे मूर्ख! तू जाकर श्रीरामजीके चरण क्यों नहीं पकड़ता? यह सुनकर वह मनमें बहुत ही सकुचाकर लौट गया। उसकी सारी श्री जाती रही। वह ऐसा तेजहीन हो गया जैसे मध्याह्नमें चन्द्रमा दिखायी देता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 805 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गहसि न राम चरन सठ जाई। सुनत फिरा मन अति सकुचाई।।
English explanation
‘Fool, why do you not go and grasp Rama’s feet?’ Hearing this, Ravana turned back, deeply ashamed at heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहसि | तू पकड़ता है | you grasp |
| न | क्यों नहीं | why not |
| राम | राम के | Rama’s |
| चरन | चरण | feet |
| सठ | अरे मूर्ख | O fool |
| जाई | जाकर | having gone |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| फिरा | लौट गया | turned back |
| मन | मन में | at heart |
| अति | अत्यंत | deeply |
| सकुचाई | लज्जित होकर | feeling ashamed |
2 भयउ तेजहत श्री सब गई। मध्य दिवस जिमि ससि सोहई।।
English explanation
Ravana lost his radiance; all his splendor departed. He looked like the moon at midday.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हो गया | became |
| तेजहत | तेजहीन | bereft of radiance |
| श्री | शोभा | splendor |
| सब | सारी | all |
| गई | चली गई | departed |
| मध्य | मध्य में | in the middle of |
| दिवस | दिन | the day |
| जिमि | जैसे | like |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| सोहई | दिखता है | appears |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 805
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 805, 807
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