लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कपि बल देखि सकल हियँ हारे। उठा आपु कपि कें परचारे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअङ्गदका बल देखकर सब हृदयमें हार गये। तब अङ्गदके ललकारनेपर रावण स्वयं उठा। जब वह अङ्गदका चरण पकडऩे लगा, तब बालिकुमार अङ्गदने कहा—मेरा चरण पकडऩेसे तेरा बचाव नहीं होगा!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 805 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कपि बल देखि सकल हियँ हारे। उठा आपु कपि कें परचारे।।
गहत चरन कह बालिकुमारा। मम पद गहें न तोर उबारा।।
स्रोत अभिलेख 6.35 · पुस्तक पृ. 805, 807
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कपि बल देखि सकल हियँ हारे। उठा आपु कपि कें परचारे।।
English explanation
AI draft: Seeing Angada’s strength, all lost heart. Ravana himself rose at the monkey warrior’s challenge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपि | वानर अंगद का | of Angada, the monkey warrior |
| बल | बल | strength |
| देखि | देखकर | seeing |
| सकल | सभी | all |
| हियँ | हृदय में | at heart |
| हारे | हार गए | lost heart |
| उठा | उठा | rose |
| आपु | स्वयं रावण | Ravana himself |
| कपि | वानर अंगद | Angada, the monkey warrior |
| कें | की | of |
| परचारे | ललकार पर | at the challenge |
2 गहत चरन कह बालिकुमारा। मम पद गहें न तोर उबारा।।
English explanation
As Ravana began to grasp his feet, Angada, Bali’s son, said, ‘Grasping my feet will not save you.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहत | पकड़ते समय | while grasping |
| चरन | चरण | feet |
| कह | कहा | said |
| बालिकुमारा | बालि के पुत्र अंगद ने | Angada, Bali’s son |
| मम | मेरे | my |
| पद | पैर | feet |
| गहें | पकड़ने से | by grasping |
| न | नहीं | not |
| तोर | तेरा | your |
| उबारा | उद्धार | deliverance |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 805
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 805, 807
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।