लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ।।
मूल पाठ
अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ।।
जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि सन बोले बलबीरा।।
स्रोत अभिलेख 6.6 · पुस्तक पृ. 829, 829
भावार्थ
मूल पाठ के बादहा दैव! मैं जगत्में क्यों जन्मा? प्रभुके एक भी काम न आया। फिर कुअवसर (विपरीत समय) जानकर मनमें धीरज धरकर बलवीर भरतजी हनुमान्जीसे बोले—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 829 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ।।
English explanation
Alas, Fate! Why was I born into this world? I have been of use to my Lord in not even one task.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अहह | हाय | alas |
| दैव | हे विधाता | O Fate |
| मैं | मैं | I |
| कत | क्यों | why |
| जग | संसार में | in the world |
| जायउँ | जन्मा | was born |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम | my Lord Rama |
| के | के | of |
| एकहु | एक भी | even one |
| काज | काम | task |
| न | नहीं | not |
| आयउँ | काम आया | was of use |
2 जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि सन बोले बलबीरा।।
English explanation
Recognizing the ill-timed circumstances and steadying his mind, the mighty hero Bharata spoke again to Hanuman.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | recognizing |
| कुअवसरु | प्रतिकूल समय | ill-timed circumstances |
| मन | मन में | in his mind |
| धरि | धारण करके | holding |
| धीरा | धीरज | composure |
| पुनि | फिर | again |
| कपि | हनुमान | Hanuman |
| सन | से | to |
| बोले | बोले | spoke |
| बलबीरा | बलवान वीर भरत | Bharata, the mighty hero |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 829
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 829, 829
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।