लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात कुसल कहु सुखनिधान की। सहित अनुज अरु मातु जानकी।।
मूल पाठ
तात कुसल कहु सुखनिधान की। सहित अनुज अरु मातु जानकी।।
कपि सब चरित समास बखाने। भए दुखी मन महुँ पछिताने।।
स्रोत अभिलेख 6.6 · पुस्तक पृ. 829, 829
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[भरतजी बोले—] हे तात! छोटे भाई लक्ष्मण तथा माता जानकीसहित सुखनिधान श्रीरामजीकी कुशल कहो। वानर (हनुमान्जी)ने संक्षेपमें सब कथा कही। सुनकर भरतजी दुखी हुए और मनमें पछताने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 829 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तात कुसल कहु सुखनिधान की। सहित अनुज अरु मातु जानकी।।
English explanation
Dear one, tell me of the well-being of Rama, the treasury of happiness, together with his younger brother and Mother Janaki.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे प्रिय | dear one |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| कहु | बताओ | tell |
| सुखनिधान | सुख के भंडार श्रीराम | Rama, the treasury of happiness |
| की | की | of |
| सहित | साथ में | together with |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | his younger brother Lakshmana |
| अरु | और | and |
| मातु | माता | Mother |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
2 कपि सब चरित समास बखाने। भए दुखी मन महुँ पछिताने।।
English explanation
Hanuman briefly recounted all the events. Bharata became sorrowful and felt regret within.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपि | वानर हनुमान | Hanuman, the monkey |
| सब | सब | all |
| चरित | घटनाएँ | events |
| समास | संक्षेप में | briefly |
| बखाने | वर्णन किया | recounted |
| भए | हो गए | became |
| दुखी | दुखी | sorrowful |
| मन | मन | mind |
| महुँ | में | in |
| पछिताने | पछताए | felt regret |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 829
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 829, 829
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