लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे तात! तुमको जानेमें देर होगी और सबेरा होते ही काम बिगड़ जायगा। [अत:] तुम पर्वतसहित मेरे बाणपर चढ़ जाओ, मैं तुमको वहाँ भेज दूँ जहाँ कृपाके धाम श्रीरामजी हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 829 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता।।
चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता।।
स्रोत अभिलेख 6.6 · पुस्तक पृ. 829, 829
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता।।
English explanation
Dear one, your journey will take time; at daybreak the task will be spoiled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे प्रिय | dear one |
| गहरु | देर | delay |
| होइहि | होगी | will occur |
| तोहि | तुम्हें | for you |
| जाता | जाने में | in going |
| काजु | काम | task |
| नसाइहि | बिगड़ जाएगा | will be spoiled |
| होत | होते ही | as soon as it becomes |
| प्रभाता | प्रभात | daybreak |
2 चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता।।
English explanation
Climb onto my arrow with the mountain. Let me send you where Rama, the abode of compassion, is.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चढ़ु | चढ़ो | climb onto |
| मम | मेरे | my |
| सायक | बाण पर | onto the arrow |
| सैल | पर्वत | mountain |
| समेता | सहित | together with |
| पठवौं | मैं भेज दूँ | let me send |
| तोहि | तुम्हें | you |
| जहँ | जहाँ | where |
| कृपानिकेता | कृपा के धाम श्रीराम | Rama, the abode of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 829
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 829, 829
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।