लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि कपि मन उपजा अभिमाना। मोरें भार चलिहि किमि बाना।।
मूल पाठ
सुनि कपि मन उपजा अभिमाना। मोरें भार चलिहि किमि बाना।।
राम प्रभाव बिचारि बहोरी। बंदि चरन कह कपि कर जोरी।।
स्रोत अभिलेख 6.6 · पुस्तक पृ. 829, 829
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीकी यह बात सुनकर [एक बार तो] हनुमान्जीके मनमें अभिमान उत्पन्न हुआ कि मेरे बोझसे बाण कैसे चलेगा? [किन्तु] फिर श्रीरामचन्द्रजीके प्रभावका विचार करके वे भरतजीके चरणोंकी वन्दना करके हाथ जोड़कर बोले—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 829 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि कपि मन उपजा अभिमाना। मोरें भार चलिहि किमि बाना।।
English explanation
Hearing this, pride arose in Hanuman’s mind: How will the arrow travel under my weight?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| कपि | हनुमान के | Hanuman’s |
| मन | मन में | in the mind |
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| अभिमाना | अभिमान | pride |
| मोरें | मेरे | my |
| भार | भार से | under the weight |
| चलिहि | चलेगा | will travel |
| किमि | कैसे | how |
| बाना | बाण | the arrow |
2 राम प्रभाव बिचारि बहोरी। बंदि चरन कह कपि कर जोरी।।
English explanation
Then, reflecting on Rama’s power, Hanuman bowed at Bharata’s feet and spoke with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम के | Rama’s |
| प्रभाव | सामर्थ्य | power |
| बिचारि | विचार करके | reflecting on |
| बहोरी | फिर | then |
| बंदि | वंदना करके | bowing to |
| चरन | भरत के चरण | Bharata’s feet |
| कह | कहा | said |
| कपि | हनुमान ने | Hanuman |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | folding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 829
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 829, 829
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।