लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिन्धु पहिं आए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददेवता और सिद्ध स्तुति करके चले गये, तब लक्ष्मणजी कृपाके समुद्र श्रीरामजीके पास आये। रावणने ज्यों ही पुत्रवधका समाचार सुना, त्यों ही वह मूॢच्छत होकर पृथ्वीपर गिर पड़ा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 847 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिन्धु पहिं आए।।
सुत बध सुना दसानन जबहीं। मुरुछित भयउ परेउ महि तबहीं।।
स्रोत अभिलेख 6.77 · पुस्तक पृ. 847, 848
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिन्धु पहिं आए।।
English explanation
After offering praise, the gods and perfected beings departed. Lakshmana came to Rama, the ocean of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| करि | करके | having offered |
| सुर | देवता | gods |
| सिद्ध | सिद्ध, साधना में सिद्धि प्राप्त प्राणी | spiritually perfected beings |
| सिधाए | चले गए | departed |
| लछिमन | लक्ष्मण, श्रीराम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| कृपासिन्धु | कृपा के सागर श्रीराम | Rama, the ocean of compassion |
| पहिं | के पास | to |
| आए | आए | came |
2 सुत बध सुना दसानन जबहीं। मुरुछित भयउ परेउ महि तबहीं।।
English explanation
As soon as Ravana heard of his son’s killing, he fainted and fell to the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र का | his son’s |
| बध | वध | killing |
| सुना | सुना | heard |
| दसानन | दस मुखों वाला रावण | Ravana, the ten-headed king |
| जबहीं | जैसे ही | as soon as |
| मुरुछित | मूर्च्छित, बेहोश | unconscious |
| भयउ | हो गया | became |
| परेउ | गिर पड़ा | fell |
| महि | धरती पर | to the ground |
| तबहीं | उसी समय | at that very moment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.77
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 847
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 847, 848
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।