लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिं। श्रीरघुनाथ बिमल जसु गावहिं।।
मूल पाठ
बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिं। श्रीरघुनाथ बिमल जसु गावहिं।।
जय अनंत जय जगदाधारा। तुम्ह प्रभु सब देवन्हि निस्तारा।।
स्रोत अभिलेख 6.77 · पुस्तक पृ. 847, 848
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे फूल बरसाकर नगाड़े बजाते हैं और श्रीरघुनाथजीका निर्मल यश गाते हैं। हे अनन्त! आपकी जय हो, हे जगदाधार! आपकी जय हो। हे प्रभो! आपने सब देवताओंका [महान् विपत्तिसे] उद्धार किया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 847 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिं। श्रीरघुनाथ बिमल जसु गावहिं।।
English explanation
They shower flowers, sound kettledrums, and sing the spotless glory of Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरषि | बरसाकर | having showered |
| सुमन | फूल | flowers |
| दुंदुभीं | दुंदुभियाँ, नगाड़े | kettledrums |
| बजावहिं | बजाते हैं | sound |
| श्रीरघुनाथ | श्रीराम का | of Lord Rama |
| बिमल | निर्मल | spotless |
| जसु | यश | glory |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
2 जय अनंत जय जगदाधारा। तुम्ह प्रभु सब देवन्हि निस्तारा।।
English explanation
Hail to you, the infinite one! Hail to you, the support of the world! Lord, you have delivered all the gods from danger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | जय हो | hail |
| अनंत | हे अनंत, असीम प्रभु | O infinite Lord |
| जय | जय हो | hail |
| जगदाधारा | हे जगत के आधार | O support of the world |
| तुम्ह | आपने | you |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| सब | सभी | all |
| देवन्हि | देवताओं को | the gods |
| निस्तारा | संकट से उबारा | delivered from danger |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.77
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 847
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 847, 848
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।