लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला।।
मूल पाठ
असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला।।
स्रोत अभिलेख 6.78 · पुस्तक पृ. 848, 848
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस समय असंख्य अशकुन होने लगे। पर अपनी भुजाओंके बलका बड़ा गर्व होनेसे रावण उन्हें गिनता नहीं है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 848 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला।।
English explanation
Countless ill omens appeared at that time, but Ravana paid them no heed, filled with immense pride in his strength of arms.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असगुन | अपशकुन | ill omens |
| अमित | अनगिनत | countless |
| होहिं | हो रहे थे | were occurring |
| तेहि | उस | that |
| काला | समय | time |
| गनइ | परवाह करता था | paid heed |
| न | नहीं | not |
| भुजबल | भुजाओं के बल का | in his strength of arms |
| गर्ब | गर्व | pride |
| बिसाला | बहुत बड़ा | immense |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 848
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 848, 848
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।