लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा कहकर उसने पवनके समान तेज चलनेवाला रथ सजाया। सारे जुझाऊ (लड़ाईके) बाजे बजने लगे। सब अतुलनीय बलवान् वीर ऐसे चले मानो काजलकी आँधी चली हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 848 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा।।
चले बीर सब अतुलित बली। जनु कज्जल कै आँधी चली।।
स्रोत अभिलेख 6.78 · पुस्तक पृ. 848, 848
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा।।
English explanation
Saying this, he readied a chariot swift as the wind. All the martial instruments sounded.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| मरुत | वायु के समान | like the wind |
| बेग | वेग वाला | swift |
| रथ | रथ | a chariot |
| साजा | तैयार किया | readied |
| बाजे | बज उठे | sounded |
| सकल | सभी | all |
| जुझाऊ | युद्ध के | martial |
| बाजा | बाजे | musical instruments |
2 चले बीर सब अतुलित बली। जनु कज्जल कै आँधी चली।।
English explanation
All the warriors of incomparable strength marched forth, as though a storm of soot-black pigment had swept out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | marched forth |
| बीर | वीर योद्धा | warriors |
| सब | सभी | all |
| अतुलित | अतुलनीय | incomparably |
| बली | बलवान | powerful |
| जनु | मानो | as though |
| कज्जल | काजल | soot-black eye pigment |
| कै | की | of |
| आँधी | आँधी | a storm |
| चली | चल पड़ी | swept forth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 848
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 848, 848
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