लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई।।
मूल पाठ
सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई।।
निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा। देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा।।
स्रोत अभिलेख 6.78 · पुस्तक पृ. 848, 848
भावार्थ
मूल पाठ के बादअच्छा है वह अभी भाग जाय। युद्धमें जाकर विमुख होने (भागने) में भलाई नहीं है। मैंने अपनी भुजाओंके बलपर वैर बढ़ाया है। जो शत्रु चढ़ आया है, उसको मैं [अपने ही] उत्तर दे लूँगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 848 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई।।
English explanation
He had better flee now; turning away during battle will not end well.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that person |
| अबहीं | अभी ही | right now |
| बरु | बल्कि बेहतर हो कि | had better |
| जाउ | चला जाए | let him go |
| पराई | भागकर | fleeing |
| संजुग | युद्ध में | in battle |
| बिमुख | पीठ फेरने वाला | turning away |
| भएँ | होने पर | upon becoming |
| न | नहीं | not |
| भलाई | भला परिणाम | a good outcome |
2 निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा। देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा।।
English explanation
Relying on my own strength of arms, I have intensified this enmity; I will answer the enemy who has advanced against me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपनी | my own |
| भुज | भुजाओं के | of arms |
| बल | बल पर | relying on the strength |
| मैं | मैंने | I |
| बयरु | वैर | enmity |
| बढ़ावा | बढ़ाया | intensified |
| देहउँ | मैं दूँगा | I will give |
| उतरु | उत्तर | an answer |
| जो | जो | who |
| रिपु | शत्रु | the enemy |
| चढ़ि | आक्रमण करके | advancing to attack |
| आवा | आया है | has come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 848
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 848, 848
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।