लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब कहु कुसल बालि कहँ अहई। बिहँसि बचन तब अंगद कहई।।
मूल पाठ
अब कहु कुसल बालि कहँ अहई। बिहँसि बचन तब अंगद कहई।।
दिन दस गएँ बालि पहिं जाई। बूझेहु कुसल सखा उर लाई।।
स्रोत अभिलेख 6.21 · पुस्तक पृ. 791, 792
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब बालिकी कुशल तो बता, वह [आजकल] कहाँ है? तब अंगदने हँसकर कहा—दस (कुछ) दिन बीतनेपर [स्वयं ही] बालिके पास जाकर, अपने मित्रको हृदयसे लगाकर, उसीसे कुशल पूछ लेना॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 791 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अब कहु कुसल बालि कहँ अहई। बिहँसि बचन तब अंगद कहई।।
English explanation
Now tell me how Bali fares; where is he? Then Angada replied with a laugh.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| कहु | बताओ | tell |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| बालि | बालि | Bali |
| कहँ | कहाँ | where |
| अहई | है | is |
| बिहँसि | हँसकर | laughing |
| बचन | वचन | words |
| तब | तब | then |
| अंगद | अंगद | Angada |
| कहई | कहते हैं | says |
2 दिन दस गएँ बालि पहिं जाई। बूझेहु कुसल सखा उर लाई।।
English explanation
After ten days, go to Bali, embrace your friend, and ask how he fares.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिन | दिन | days |
| दस | दस | ten |
| गएँ | बीतने पर | after passing |
| बालि | बालि | Bali |
| पहिं | के पास | to |
| जाई | जाकर | having gone |
| बूझेहु | पूछ लेना | ask |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| सखा | मित्र को | your friend |
| उर | छाती से | to your chest |
| लाई | लगाकर | having embraced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 791
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 791, 792
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