लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम बिरोध कुसल जसि होई। सो सब तोहि सुनाइहि सोई।।
मूल पाठ
राम बिरोध कुसल जसि होई। सो सब तोहि सुनाइहि सोई।।
सुनु सठ भेद होइ मन ताकें। श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें।।
स्रोत अभिलेख 6.21 · पुस्तक पृ. 791, 792
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीसे विरोध करनेपर जैसी कुशल होती है, वह सब तुमको वे सुनावेंगे। हे मूर्ख! सुन, भेद उसीके मनमें पड़ सकता है, (भेदनीति उसीपर अपना प्रभाव डाल सकती है) जिसके हृदयमें श्रीरघुवीर न हों॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 791 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम बिरोध कुसल जसि होई। सो सब तोहि सुनाइहि सोई।।
English explanation
Bali himself will tell you all about the kind of well-being that comes from opposing Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम से | Rama |
| बिरोध | विरोध करने पर | in opposing |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| जसि | जैसी | whatever kind |
| होई | होती है | results |
| सो | वह | that |
| सब | सब | all |
| तोहि | तुम्हें | to you |
| सुनाइहि | सुनाएगा | will recount |
| सोई | वही बालि | Bali himself |
2 सुनु सठ भेद होइ मन ताकें। श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें।।
English explanation
Listen, fool: divisive distinctions arise in the mind of one whose heart does not hold Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुन | listen |
| सठ | मूर्ख | fool |
| भेद | भेदभाव | divisive distinctions |
| होइ | होता है | arises |
| मन | मन में | in the mind |
| ताकें | उसके | of that person |
| श्रीरघुबीर | श्रीराम, रघुवंश के वीर | Lord Rama, hero of Raghu's lineage |
| हृदय | हृदय में | in the heart |
| नहिं | नहीं हैं | is not present |
| जाकें | जिसके | whose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 791
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 791, 792
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