किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 6 · दोहा/सोरठा
सुनु सुग्रीव मारिहउँ बालिहि एकहिं बान।
सुनु सुग्रीव मारिहउँ बालिहि एकहिं बान।
ब्रम्ह रुद्र सरनागत गएँ न उबरिहिं प्रान।।6।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.6 · पुस्तक पृ. 686, 687
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनु सुग्रीव मारिहउँ बालिहि एकहिं बान।
सुग्रीव, सुनो! मैं बालि को एक ही बाण से मारूँगा।
English explanation
Listen, Sugriva! I will kill Bali with a single arrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| सुग्रीव | हे सुग्रीव | O Sugriva |
| मारिहउँ | मैं मारूँगा | I will kill |
| बालिहि | बालि को | Bali |
| एकहिं | एक ही | just one |
| बान | बाण से | with an arrow |
2 ब्रम्ह रुद्र सरनागत गएँ न उबरिहिं प्रान।।6।।
ब्रह्मा और रुद्र की शरण में जाने पर भी उसके प्राण नहीं बचेंगे।
English explanation
Even if he seeks refuge with Brahma and Rudra, his life will not be saved.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रम्ह | ब्रह्मा की | of Brahma, the creator deity |
| रुद्र | रुद्र अर्थात शिव की | of Rudra, Shiva |
| सरनागत | शरण में | into refuge |
| गएँ | जाने पर भी | even upon going |
| न | नहीं | not |
| उबरिहिं | बचेंगे | will be saved |
| प्रान | प्राण | his life |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 6
- स्रोत अभिलेख
- 4.6
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 686, 687
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।