किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 7 · दोहा/सोरठा
कह बालि सुनु भीरु प्रिय समदरसी रघुनाथ।
कह बालि सुनु भीरु प्रिय समदरसी रघुनाथ।
जौं कदाचि मोहि मारहिं तौ पुनि होउँ सनाथ।।7।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.7 · पुस्तक पृ. 687, 690
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कह बालि सुनु भीरु प्रिय समदरसी रघुनाथ।
बालि ने कहा, ‘हे भयभीत प्रिये, सुनो; राम सबको समान दृष्टि से देखते हैं।’
English explanation
Bali said, ‘Listen, my fearful beloved: Rama regards all impartially.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| बालि | बालि ने | Bali |
| सुनु | सुनो | listen |
| भीरु | हे भयभीत | O fearful one |
| प्रिय | प्रिये | beloved |
| समदरसी | सबको समान देखने वाले | impartial toward all |
| रघुनाथ | राम | Rama |
2 जौं कदाचि मोहि मारहिं तौ पुनि होउँ सनाथ।।7।।
‘यदि कभी वे मुझे मार भी दें, तो भी मैं उनके आश्रय से सनाथ हो जाऊँगा।’
English explanation
‘If he should happen to kill me, even then I shall gain a Lord's protection.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| कदाचि | कदाचित | by chance |
| मोहि | मुझे | me |
| मारहिं | वे मारें | he kills |
| तौ | तो | then |
| पुनि | भी | even so |
| होउँ | मैं हो जाऊँ | I shall become |
| सनाथ | स्वामी का आश्रय पाने वाला | under a Lord's protection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 7
- स्रोत अभिलेख
- 4.7
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन · सुग्रीवका वैराग्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 687, 690
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