किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 30 (ख) · दोहा/सोरठा
नीलोत्पल तन स्याम काम कोटि सोभा अधिक।
नीलोत्पल तन स्याम काम कोटि सोभा अधिक।
सुनिअ तासु गुन ग्राम जासु नाम अघ खग बधिक।।30(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.3 · पुस्तक पृ. 710, 711
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 नीलोत्पल तन स्याम काम कोटि सोभा अधिक।
जिनका शरीर नीले कमल जैसा श्याम है और जिनकी शोभा करोड़ों कामदेवों से बढ़कर है—
English explanation
Whose body is dark like a blue lotus, and whose beauty surpasses that of millions of love-gods—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीलोत्पल | नीला कमल | blue lotus |
| तन | शरीर | body |
| स्याम | श्याम वर्ण का | dark-hued |
| काम | कामदेव | the god of love |
| कोटि | करोड़ों | tens of millions |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| अधिक | से बढ़कर | surpassing |
2 सुनिअ तासु गुन ग्राम जासु नाम अघ खग बधिक।।30(ख)।।
उन राम के गुणों का समूह सुनिए, जिनका नाम पापरूपी पक्षियों का वधिक है।
English explanation
Listen to the many virtues of that Rama, whose name is a hunter that slays the birds of sin.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनिअ | सुनिए | listen |
| तासु | उनके | his |
| गुन | गुणों | virtues |
| ग्राम | समूह | multitude |
| जासु | जिनका | whose |
| नाम | नाम | name |
| अघ | पापरूपी | sin, figured as |
| खग | पक्षियों | birds |
| बधिक | मारने वाला शिकारी | a hunter who slays |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse-reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 30 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 4.3
- सहायक विषय
- समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान्जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना · श्रीरामगुणका माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 710, 711
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।