किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सेवक सठ नृप कृपन कुनारी। कपटी मित्र सूल सम चारी।।
मूल पाठ
सेवक सठ नृप कृपन कुनारी। कपटी मित्र सूल सम चारी।।
सखा सोच त्यागहु बल मोरें। सब बिधि घटब काज मैं तोरें।।
स्रोत अभिलेख 4.7 · पुस्तक पृ. 687, 690
भावार्थ
मूल पाठ के बादमूर्ख सेवक, कंजूस राजा, कुलटा स्त्री और कपटी मित्र—ये चारों शूलके समान [पीड़ा देनेवाले] हैं। हे सखा! मेरे बलपर अब तुम चिन्ता छोड़ दो। मैं सब प्रकारसे तुम्हारे काम आऊँगा (तुम्हारी सहायता करूँगा)॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 688 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सेवक सठ नृप कृपन कुनारी। कपटी मित्र सूल सम चारी।।
English explanation
A foolish servant, a miserly king, a wicked wife, and a deceitful friend—all four are painful like a piercing thorn.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवक | सेवक | servant |
| सठ | मूर्ख | foolish |
| नृप | राजा | king |
| कृपन | कंजूस | miserly |
| कुनारी | दुष्ट पत्नी | wicked wife |
| कपटी | कपट करने वाला | deceitful |
| मित्र | मित्र | friend |
| सूल | शूल | piercing thorn |
| सम | के समान | like |
| चारी | चारों | all four |
2 सखा सोच त्यागहु बल मोरें। सब बिधि घटब काज मैं तोरें।।
English explanation
Friend, rely on my strength and give up worry; I will accomplish your purpose in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखा | हे मित्र | O friend |
| सोच | चिंता | worry |
| त्यागहु | छोड़ो | give up |
| बल | बल के भरोसे | relying on strength |
| मोरें | मेरे | my |
| सब | सभी | every |
| बिधि | प्रकार से | way |
| घटब | पूरा करूँगा | will accomplish |
| काज | काम | purpose |
| मैं | मैं | I |
| तोरें | तुम्हारा | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 688
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन · सुग्रीवका वैराग्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 687, 690
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