किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आगें कह मृदु बचन बनाई। पाछें अनहित मन कुटिलाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो सामने तो बना-बनाकर कोमल वचन कहता है और पीठ-पीछे बुराई करता है तथा मनमें कुटिलता रखता है—हे भाई! [इस तरह] जिसका मन साँपकी चालके समान टेढ़ा है, ऐसे कुमित्रको तो त्यागनेमें ही भलाई है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 688 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आगें कह मृदु बचन बनाई। पाछें अनहित मन कुटिलाई।।
जा कर चित अहि गति सम भाई। अस कुमित्र परिहरेहि भलाई।।
स्रोत अभिलेख 4.7 · पुस्तक पृ. 687, 690
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आगें कह मृदु बचन बनाई। पाछें अनहित मन कुटिलाई।।
English explanation
One who speaks carefully fashioned sweet words to your face, but acts against you behind your back and harbors deceit—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगें | सामने | to one's face |
| कह | कहता है | speaks |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बचन | वचन | words |
| बनाई | गढ़कर | carefully fashioning |
| पाछें | पीठ पीछे | behind one's back |
| अनहित | अहित | harm |
| मन | मन में | in the mind |
| कुटिलाई | कुटिलता | deceitfulness |
2 जा कर चित अहि गति सम भाई। अस कुमित्र परिहरेहि भलाई।।
English explanation
Brother, it is best to abandon such a false friend whose mind is crooked like a snake's movement.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जा | जिस | whose |
| कर | का | possessive marker |
| चित | मन | mind |
| अहि | साँप की | a snake's |
| गति | चाल | movement |
| सम | के समान | like |
| भाई | हे भाई | O brother |
| अस | ऐसा | such |
| कुमित्र | बुरा मित्र | false friend |
| परिहरेहि | त्यागने में | in abandoning |
| भलाई | भलाई | benefit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 688
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन · सुग्रीवका वैराग्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 687, 690
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