किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि संपाति बंधु कै करनी। रघुपति महिमा बधुबिधि बरनी।।
मूल पाठ
सुनि संपाति बंधु कै करनी। रघुपति महिमा बधुबिधि बरनी।।
स्रोत अभिलेख 4.27 · पुस्तक पृ. 707, 708
भावार्थ
मूल पाठ के बादभाई जटायुकी करनी सुनकर सम्पातीने बहुत प्रकारसे श्रीरघुनाथजीकी महिमा वर्णन की॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 708 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि संपाति बंधु कै करनी। रघुपति महिमा बधुबिधि बरनी।।
English explanation
Hearing of his brother’s deeds, Sampati described Rama’s greatness in many ways. (The reading ‘बधुबिधि’ is uncertain.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| संपाति | संपाती, जटायु के भाई | Sampati, Jatayu’s brother |
| बंधु | भाई | brother |
| कै | की | of; possessive marker |
| करनी | करनी; किए हुए कार्य | deeds |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम की | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| महिमा | महिमा | greatness; glory |
| बधुबिधि | संभवतः अनेक प्रकार से | probably, in many ways |
| बरनी | वर्णन किया | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 708
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 707, 708
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।