किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि खग हरष सोक जुत बानी । आवा निकट कपिन्ह भय मानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहर्ष और शोकसे युक्त वाणी (समाचार) सुनकर वह पक्षी (सम्पाती) वानरोंके पास आया। वानर डर गये। उनको अभय करके (अभय-वचन देकर) उसने पास जाकर जटायुका वृत्तान्त पूछा, तब उन्होंने सारी कथा उसे कह सुनायी॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 708 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि खग हरष सोक जुत बानी । आवा निकट कपिन्ह भय मानी।।
तिन्हहि अभय करि पूछेसि जाई। कथा सकल तिन्ह ताहि सुनाई।।
स्रोत अभिलेख 4.27 · पुस्तक पृ. 707, 708
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि खग हरष सोक जुत बानी । आवा निकट कपिन्ह भय मानी।।
English explanation
Hearing words mingled with joy and sorrow, the bird Sampati came closer; the monkeys became afraid.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| खग | पक्षी संपाती | the bird Sampati |
| हरष | हर्ष | joy |
| सोक | शोक | sorrow |
| जुत | से युक्त | mingled with |
| बानी | वाणी; कही हुई बात | speech; words |
| आवा | आया | came |
| निकट | पास | near |
| कपिन्ह | वानरों ने | the monkeys |
| भय | डर | fear |
| मानी | अनुभव किया | felt |
2 तिन्हहि अभय करि पूछेसि जाई। कथा सकल तिन्ह ताहि सुनाई।।
English explanation
Sampati went to them, reassured them, and asked; they told him the entire story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्हहि | उन वानरों को | those monkeys |
| अभय | निर्भय | free from fear |
| करि | करके | having made |
| पूछेसि | उसने पूछा | he asked |
| जाई | जाकर | having gone to them |
| कथा | कथा; वृत्तांत | story; account |
| सकल | सारी | entire |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| ताहि | उसे | to him |
| सुनाई | सुनाई | related |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 708
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 707, 708
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।