किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह अंगद बिचारि मन माहीं। धन्य जटायू सम कोउ नाहीं।।
मूल पाठ
कह अंगद बिचारि मन माहीं। धन्य जटायू सम कोउ नाहीं।।
राम काज कारन तनु त्यागी । हरि पुर गयउ परम बड़ भागी।।
स्रोत अभिलेख 4.27 · पुस्तक पृ. 707, 708
भावार्थ
मूल पाठ के बादअंगदने मनमें विचारकर कहा—अहा! जटायुके समान धन्य कोई नहीं है। श्रीरामजीके कार्यके लिये शरीर छोड़कर वह परम बड़भागी भगवान्के परमधामको चला गया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 707 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कह अंगद बिचारि मन माहीं। धन्य जटायू सम कोउ नाहीं।।
English explanation
Reflecting inwardly, Angada said, ‘No one equals the blessed Jatayu.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहते हैं | says |
| अंगद | अंगद, बाली के पुत्र | Angada, Bali’s son |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
| मन | मन | the mind |
| माहीं | के भीतर | within |
| धन्य | धन्य; प्रशंसनीय | blessed; worthy of praise |
| जटायू | जटायु, सीता की रक्षा में प्राण देने वाले गिद्ध | Jatayu, the vulture who died defending Sita |
| सम | के समान | equal to |
| कोउ | कोई | anyone |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
2 राम काज कारन तनु त्यागी । हरि पुर गयउ परम बड़ भागी।।
English explanation
Giving up his body for Rama’s cause, he went to Hari’s abode; he is supremely fortunate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम के | Rama’s |
| काज | कार्य | work; cause |
| कारन | के लिए | for the sake of |
| तनु | शरीर | body |
| त्यागी | त्यागकर | having relinquished |
| हरि | हरि, भगवान विष्णु का | of Hari, Lord Vishnu |
| पुर | धाम | abode |
| गयउ | गए | went |
| परम | अत्यंत | supremely |
| बड़ | बड़े | greatly |
| भागी | भाग्यशाली | fortunate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 707
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 707, 708
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।