किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
डरपे गीध बचन सुनि काना। अब भा मरन सत्य हम जाना।।
मूल पाठ
डरपे गीध बचन सुनि काना। अब भा मरन सत्य हम जाना।।
कपि सब उठे गीध कहँ देखी। जामवंत मन सोच बिसेषी।।
स्रोत अभिलेख 4.27 · पुस्तक पृ. 707, 708
भावार्थ
मूल पाठ के बादगीधके वचन कानोंसे सुनते ही सब डर गये कि अब सचमुच ही मरना हो गया, यह हमने जान लिया। फिर उस गीध (सम्पाती) को देखकर सब वानर उठ खड़े हुए। जाम्बवान्के मनमें विशेष सोच हुआ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 707 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 डरपे गीध बचन सुनि काना। अब भा मरन सत्य हम जाना।।
English explanation
Hearing the vulture’s words, the monkeys became frightened: ‘Now death is certain—we know it.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| डरपे | डर गए | became frightened |
| गीध | गिद्ध के | the vulture’s |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| काना | कानों से | with their ears |
| अब | अब | now |
| भा | हो गया | has become |
| मरन | मरना; मृत्यु | death |
| सत्य | निश्चित; सच | certain; true |
| हम | हमने | we |
| जाना | जान लिया | have understood |
2 कपि सब उठे गीध कहँ देखी। जामवंत मन सोच बिसेषी।।
English explanation
Seeing the vulture, all the monkeys rose; Jambavan felt deep concern.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपि | वानर | monkeys |
| सब | सभी | all |
| उठे | उठ खड़े हुए | rose to their feet |
| गीध | गिद्ध | the vulture |
| कहँ | को | object marker |
| देखी | देखकर | having seen |
| जामवंत | जामवंत, रीछों के वृद्ध नेता | Jambavan, the elder bear-chief |
| मन | मन में | in his mind |
| सोच | चिंता | concern |
| बिसेषी | विशेष; बहुत | great; intense |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 707
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 707, 708
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।