किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुखी मीन जे नीर अगाधा। जिमि हरि सरन न एकउ बाधा।।
मूल पाठ
सुखी मीन जे नीर अगाधा। जिमि हरि सरन न एकउ बाधा।।
फूलें कमल सोह सर कैसा। निर्गुन ब्रम्ह सगुन भएँ जैसा।।
स्रोत अभिलेख 4.17 · पुस्तक पृ. 698, 699
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो मछलियाँ अथाह जलमें हैं, वे सुखी हैं, जैसे श्रीहरिके शरणमें चले जानेपर एक भी बाधा नहीं रहती। कमलोंके फूलनेसे तालाब कैसी शोभा दे रहा है, जैसे निर्गुण ब्रह्म सगुण होनेपर शोभित होता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 698 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुखी मीन जे नीर अगाधा। जिमि हरि सरन न एकउ बाधा।।
English explanation
Fish living in deep water are happy, just as those sheltered by Hari face not even a single obstacle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुखी | सुखी | happy |
| मीन | मछलियाँ | fish |
| जे | जो | those that |
| नीर | जल में | in water |
| अगाधा | अथाह, बहुत गहरा | unfathomably deep |
| जिमि | जैसे | just as |
| हरि | भगवान हरि की | of Lord Hari |
| सरन | शरण में | in refuge |
| न | नहीं | not |
| एकउ | एक भी | even one |
| बाधा | बाधा | obstacle |
2 फूलें कमल सोह सर कैसा। निर्गुन ब्रम्ह सगुन भएँ जैसा।।
English explanation
How splendid the lake looks with its blooming lotuses—like attributeless Brahman when manifest with attributes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फूलें | खिले हुए | blooming |
| कमल | कमलों से | with lotuses |
| सोह | शोभित होता है | looks splendid |
| सर | सरोवर | the lake |
| कैसा | कैसा सुंदर | how splendidly |
| निर्गुन | गुणों से रहित | without attributes |
| ब्रम्ह | परम तत्त्व ब्रह्म | Brahman, the ultimate reality |
| सगुन | गुणों सहित प्रकट | manifest with attributes |
| भएँ | हो जाने पर | upon becoming |
| जैसा | जैसा | as it would |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 698
- सहायक विषय
- शरद्-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 698, 699
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।