किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ससि संपन्न सोह महि कैसी। उपकारी कै संपति जैसी।।
मूल पाठ
ससि संपन्न सोह महि कैसी। उपकारी कै संपति जैसी।।
निसि तम घन खद्योत बिराजा। जनु दंभिन्ह कर मिला समाजा।।
स्रोत अभिलेख 4.15 · पुस्तक पृ. 696, 697
भावार्थ
मूल पाठ के बादअन्नसे युक्त (लहलहाती हुई खेतीसे हरी-भरी) पृथ्वी कैसी शोभित हो रही है, जैसी उपकारी पुरुषकी सम्पत्ति। रातके घने अन्धकारमें जुगनू शोभा पा रहे हैं, मानो दम्भियोंका समाज आ जुटा हो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 696 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ससि संपन्न सोह महि कैसी। उपकारी कै संपति जैसी।।
English explanation
How lovely the earth looks, rich in crops—like the wealth of a benefactor. (The supplied reading ‘ससि’ is uncertain here.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ससि | फसलें; संदर्भानुसार संभावित अर्थ | crops; probable contextual meaning |
| संपन्न | से संपन्न | abundant in |
| सोह | शोभती है | looks beautiful |
| महि | धरती | the earth |
| कैसी | कैसी सुंदर | how lovely |
| उपकारी | परोपकारी व्यक्ति | a benefactor |
| कै | की | of |
| संपति | संपत्ति | wealth |
| जैसी | जैसी | like |
2 निसि तम घन खद्योत बिराजा। जनु दंभिन्ह कर मिला समाजा।।
English explanation
Fireflies shine in the dense darkness of night, as though a gathering of pretentious people had assembled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसि | रात में | at night |
| तम | अंधकार | darkness |
| घन | घना | dense |
| खद्योत | जुगनू | fireflies |
| बिराजा | चमकते हैं | shine |
| जनु | मानो | as though |
| दंभिन्ह | दंभियों | pretentious people |
| कर | का | of |
| मिला | इकट्ठा हुआ | has assembled |
| समाजा | समाज | a gathering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 696
- सहायक विषय
- वर्षा-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 696, 697
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।