किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
महाबृष्टि चलि फूटि किआरीं । जिमि सुतंत्र भएँ बिगरहिं नारीं।।
मूल पाठ
महाबृष्टि चलि फूटि किआरीं । जिमि सुतंत्र भएँ बिगरहिं नारीं।।
कृषी निरावहिं चतुर किसाना। जिमि बुध तजहिं मोह मद माना।।
स्रोत अभिलेख 4.15 · पुस्तक पृ. 696, 697
भावार्थ
मूल पाठ के बादभारी वर्षासे खेतोंकी क्यारियाँ फूट चली हैं, जैसे स्वतन्त्र होनेसे स्त्रियाँ बिगड़ जाती हैं। चतुर किसान खेतोंको निरा रहे हैं (उनमेंसे घास आदिको निकालकर फेंक रहे हैं)। जैसे विद्वान् लोग मोह, मद और मानका त्याग कर देते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 697 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 महाबृष्टि चलि फूटि किआरीं । जिमि सुतंत्र भएँ बिगरहिं नारीं।।
English explanation
In the heavy rain, the boundaries of garden beds broke and washed away, likened here to women going astray when independent—a historical social comparison in the verse.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महाबृष्टि | भारी वर्षा से | through heavy rain |
| चलि | बह चलीं | washed away |
| फूटि | टूटकर | having broken |
| किआरीं | क्यारियाँ; यहाँ उनकी मेड़ें | garden beds; here their boundaries |
| जिमि | जैसे | just as |
| सुतंत्र | स्वतंत्र | independent |
| भएँ | होने पर | upon becoming |
| बिगरहिं | बिगड़ जाती हैं | go astray |
| नारीं | स्त्रियाँ | women |
2 कृषी निरावहिं चतुर किसाना। जिमि बुध तजहिं मोह मद माना।।
English explanation
Skilled farmers weed their fields, just as the wise abandon delusion, arrogance, and pride.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृषी | खेती की | the cultivated fields |
| निरावहिं | निराई करते हैं | weed |
| चतुर | चतुर | skilled |
| किसाना | किसान | farmers |
| जिमि | जैसे | just as |
| बुध | बुद्धिमान लोग | the wise |
| तजहिं | छोड़ते हैं | abandon |
| मोह | मोह | delusion and attachment |
| मद | मद | arrogance |
| माना | अभिमान | pride |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 697
- सहायक विषय
- वर्षा-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 696, 697
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।