किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखिअत चक्रबाक खग नाहीं। कलिहि पाइ जिमि धर्म पराहीं।।
मूल पाठ
देखिअत चक्रबाक खग नाहीं। कलिहि पाइ जिमि धर्म पराहीं।।
ऊषर बरषइ तृन नहिं जामा। जिमि हरिजन हियँ उपज न कामा।।
स्रोत अभिलेख 4.15 · पुस्तक पृ. 696, 697
भावार्थ
मूल पाठ के बादचक्रवाक पक्षी दिखायी नहीं दे रहे हैं; जैसे कलियुगको पाकर धर्म भाग जाते हैं। ऊसरमें वर्षा होती है, पर वहाँ घासतक नहीं उगती। जैसे हरिभक्तके हृदयमें काम नहीं उत्पन्न होता॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 697 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 देखिअत चक्रबाक खग नाहीं। कलिहि पाइ जिमि धर्म पराहीं।।
English explanation
Chakravaka birds are not seen, just as righteousness flees when the age of Kali arrives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखिअत | दिखाई देते | are seen |
| चक्रबाक | चकवा | ruddy shelducks |
| खग | पक्षी | birds |
| नाहीं | नहीं | not |
| कलिहि | कलियुग को | the age of Kali |
| पाइ | पाकर; आने पर | on encountering |
| जिमि | जैसे | just as |
| धर्म | धर्म | righteousness |
| पराहीं | भाग जाता है | flees |
2 ऊषर बरषइ तृन नहिं जामा। जिमि हरिजन हियँ उपज न कामा।।
English explanation
Even with rain, grass does not grow on barren saline ground, just as lust does not arise in a devotee’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऊषर | ऊसर भूमि में | on barren saline ground |
| बरषइ | वर्षा होने पर | when it rains |
| तृन | घास | grass |
| नहिं | नहीं | not |
| जामा | उगी | sprouted |
| जिमि | जैसे | just as |
| हरिजन | भगवान के भक्त के | a devotee of God’s |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| उपज | उपजती है | arises |
| न | नहीं | not |
| कामा | कामवासना | lust |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 697
- सहायक विषय
- वर्षा-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 696, 697
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।