किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अर्क जबास पात बिनु भयऊ। जस सुराज खल उद्यम गयऊ।।
मूल पाठ
अर्क जबास पात बिनु भयऊ। जस सुराज खल उद्यम गयऊ।।
खोजत कतहुँ मिलइ नहिं धूरी। करइ क्रोध जिमि धरमहि दूरी।।
स्रोत अभिलेख 4.15 · पुस्तक पृ. 696, 697
भावार्थ
मूल पाठ के बादमदार और जवासा बिना पत्तेके हो गये (उनके पत्ते झड़ गये)। जैसे श्रेष्ठ राज्यमें दुष्टोंका उद्यम जाता रहा (उनकी एक भी नहीं चलती)। धूल कहीं खोजनेपर भी नहीं मिलती, जैसे क्रोध धर्मको दूर कर देता है (अर्थात् क्रोधका आवेश होनेपर धर्मका ज्ञान नहीं रह जाता)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 696 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अर्क जबास पात बिनु भयऊ। जस सुराज खल उद्यम गयऊ।।
English explanation
The crown-flower and javasa plants have become leafless, as the efforts of the wicked come to nothing under good rule.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अर्क | आक का पौधा | the crown-flower plant |
| जबास | जवासा का पौधा | the javasa shrub |
| पात | पत्तों | leaves |
| बिनु | के बिना | without |
| भयऊ | हो गए | have become |
| जस | जैसे | just as |
| सुराज | अच्छे शासन में | under good rule |
| खल | दुष्टों के | of the wicked |
| उद्यम | प्रयास | efforts |
| गयऊ | समाप्त हो गए | have come to nothing |
2 खोजत कतहुँ मिलइ नहिं धूरी। करइ क्रोध जिमि धरमहि दूरी।।
English explanation
Even when sought, dust is nowhere to be found, just as anger drives righteousness away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खोजत | खोजने पर | when searched for |
| कतहुँ | कहीं भी | anywhere |
| मिलइ | मिलती है | is found |
| नहिं | नहीं | not |
| धूरी | धूल | dust |
| करइ | करता है | makes |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| जिमि | जैसे | just as |
| धरमहि | धर्म को | righteousness |
| दूरी | दूर | distant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 696
- सहायक विषय
- वर्षा-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 696, 697
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