किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दादुर धुनि चहु दिसा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई।।
मूल पाठ
दादुर धुनि चहु दिसा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई।।
नव पल्लव भए बिटप अनेका। साधक मन जस मिलें बिबेका।।
स्रोत अभिलेख 4.15 · पुस्तक पृ. 696, 697
भावार्थ
मूल पाठ के बादचारों दिशाओंमें मेढकोंकी ध्वनि ऐसी सुहावनी लगती है, मानो विद्याॢथयोंके समुदाय वेद पढ़ रहे हों। अनेकों वृक्षोंमें नये पत्ते आ गये हैं, जिससे वे ऐसे हरे-भरे एवं सुशोभित हो गये हैं जैसे साधकका मन विवेक (ज्ञान) प्राप्त होनेपर हो जाता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 696 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दादुर धुनि चहु दिसा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई।।
English explanation
The frogs’ calls sound pleasing in all four directions, as though a gathering of young religious students were reciting the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दादुर | मेंढक | frogs |
| धुनि | ध्वनि | calls |
| चहु | चारों | all four |
| दिसा | दिशाओं में | directions |
| सुहाई | सुहावनी लगती है | sounds pleasing |
| बेद | वेद | the Vedas |
| पढ़हिं | पढ़ते हैं | recite |
| जनु | मानो | as though |
| बटु | ब्रह्मचारी विद्यार्थी | young religious students |
| समुदाई | समुदाय | a gathering |
2 नव पल्लव भए बिटप अनेका। साधक मन जस मिलें बिबेका।।
English explanation
Many trees have put forth fresh leaves, like a seeker’s mind renewed upon gaining discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नव | नए | fresh |
| पल्लव | कोमल नए पत्ते | young leaves |
| भए | निकल आए | have emerged |
| बिटप | वृक्षों में | on trees |
| अनेका | अनेक | many |
| साधक | साधक का | a spiritual seeker’s |
| मन | मन | mind |
| जस | जैसे | just as |
| मिलें | मिलने पर | upon gaining |
| बिबेका | विवेक | discernment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 696
- सहायक विषय
- वर्षा-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 696, 697
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।