किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
समिटि समिटि जल भरहिं तलावा। जिमि सदगुन सज्जन पहिं आवा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजल एकत्र हो-होकर तालाबोंमें भर रहा है, जैसे सद्गुण [एक-एककर] सज्जनके पास चले आते हैं। नदीका जल समुद्रमें जाकर वैसे ही स्थिर हो जाता है, जैसे जीव श्रीहरिको पाकर अचल (आवागमनसे मुक्त) हो जाता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 696 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
समिटि समिटि जल भरहिं तलावा। जिमि सदगुन सज्जन पहिं आवा।।
सरिता जल जलनिधि महुँ जाई। होई अचल जिमि जिव हरि पाई।।
स्रोत अभिलेख 4.14 · पुस्तक पृ. 695, 696
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 समिटि समिटि जल भरहिं तलावा। जिमि सदगुन सज्जन पहिं आवा।।
English explanation
Water gathers and fills the ponds, just as good qualities gather in a virtuous person.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समिटि | इकट्ठा होकर | gathering |
| समिटि | इकट्ठा होकर | gathering |
| जल | जल | water |
| भरहिं | भरता है | fills |
| तलावा | तालाबों को | the ponds |
| जिमि | जैसे | just as |
| सदगुन | अच्छे गुण | good qualities |
| सज्जन | सज्जन व्यक्ति | a virtuous person |
| पहिं | के पास | to |
| आवा | आते हैं | come |
2 सरिता जल जलनिधि महुँ जाई। होई अचल जिमि जिव हरि पाई।।
English explanation
River water enters the ocean and becomes still, just as the soul becomes steadfast upon attaining Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरिता | नदी का | of the river |
| जल | जल | water |
| जलनिधि | समुद्र | the ocean |
| महुँ | में | into |
| जाई | जाकर | having gone |
| होई | हो जाता है | becomes |
| अचल | स्थिर; अडोल | still; steadfast |
| जिमि | जैसे | just as |
| जिव | जीव; व्यक्तिगत आत्मा | the individual soul |
| हरि | भगवान हरि | the Lord, Hari |
| पाई | पाकर | upon attaining |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 696
- सहायक विषय
- वर्षा-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 695, 696
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।