किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
छुद्र नदीं भरि चलीं तोराई। जस थोरेहुँ धन खल इतराई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दछोटी नदियाँ भरकर [किनारोंको] तुड़ाती हुई चलीं, जैसे थोड़े धनसे भी दुष्ट इतरा जाते हैं (मर्यादाका त्याग कर देते हैं)। पृथ्वीपर पड़ते ही पानी गँदला हो गया है, जैसे शुद्ध जीवके माया लिपट गयी हो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 696 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
छुद्र नदीं भरि चलीं तोराई। जस थोरेहुँ धन खल इतराई।।
भूमि परत भा ढाबर पानी। जनु जीवहि माया लपटानी।।
स्रोत अभिलेख 4.14 · पुस्तक पृ. 695, 696
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 छुद्र नदीं भरि चलीं तोराई। जस थोरेहुँ धन खल इतराई।।
English explanation
Small rivers, filled with water, rush along breaking their banks, just as a wicked person grows conceited over even a little wealth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छुद्र | छोटी | small |
| नदीं | नदियाँ | rivers |
| भरि | भरकर | having filled |
| चलीं | बह चलीं | began flowing |
| तोराई | किनारे तोड़ती हुई | breaking their banks |
| जस | जैसे | just as |
| थोरेहुँ | थोड़े-से भी | even a little |
| धन | धन से | with wealth |
| खल | दुष्ट व्यक्ति | a wicked person |
| इतराई | इतराता है | grows conceited |
2 भूमि परत भा ढाबर पानी। जनु जीवहि माया लपटानी।।
English explanation
Upon falling on the ground, the water became muddy, as though illusion had clung to the individual soul.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूमि | भूमि पर | on the ground |
| परत | पड़ते ही | upon falling |
| भा | हो गया | became |
| ढाबर | मटमैला; गंदला | muddy; turbid |
| पानी | पानी | water |
| जनु | मानो | as though |
| जीवहि | जीव से | to the individual soul |
| माया | माया; मोहकारी आच्छादन | illusion; deluding influence |
| लपटानी | लिपट गई | clung |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 696
- सहायक विषय
- वर्षा-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 695, 696
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।