किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लागि तृषा अतिसय अकुलाने। मिलइ न जल घन गहन भुलाने।।
मूल पाठ
लागि तृषा अतिसय अकुलाने। मिलइ न जल घन गहन भुलाने।।
मन हनुमान कीन्ह अनुमाना। मरन चहत सब बिनु जल पाना।।
स्रोत अभिलेख 4.24 · पुस्तक पृ. 704, 705
भावार्थ
मूल पाठ के बादइतनेमें ही सबको अत्यन्त प्यास लगी, जिससे सब अत्यन्त ही व्याकुल हो गये। किन्तु जल कहीं नहीं मिला। घने जंगलमें सब भुला गये। हनुमान्जीने मनमें अनुमान किया कि जल पिये बिना सब लोग मरना ही चाहते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 704 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लागि तृषा अतिसय अकुलाने। मिलइ न जल घन गहन भुलाने।।
English explanation
Thirst made them deeply distressed. They could find no water and had lost their way in the dense forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लागि | लगी | arose |
| तृषा | प्यास | thirst |
| अतिसय | अत्यंत | extremely |
| अकुलाने | व्याकुल हुए | became distressed |
| मिलइ | मिलता है | is found |
| न | नहीं | not |
| जल | पानी | water |
| घन | घना | dense |
| गहन | वन | forest |
| भुलाने | रास्ता भूल गए | lost their way |
2 मन हनुमान कीन्ह अनुमाना। मरन चहत सब बिनु जल पाना।।
English explanation
Hanuman thought to himself that they were all on the verge of dying without water to drink.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन में | in his mind |
| हनुमान | हनुमान, वानर वीर | Hanuman, the monkey hero |
| कीन्ह | किया | made |
| अनुमाना | अनुमान | an inference |
| मरन | मरने को | to die |
| चहत | हो रहे हैं | are about |
| सब | सभी | all |
| बिनु | बिना | without |
| जल | पानी | water |
| पाना | पीने के | drinking |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 704
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान · गुफामें तपस्विनीके दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 704, 705
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।