किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चढ़ि गिरि सिखर चहूँ दिसि देखा। भूमि बिबिर एक कौतुक पेखा।।
मूल पाठ
चढ़ि गिरि सिखर चहूँ दिसि देखा। भूमि बिबिर एक कौतुक पेखा।।
चक्रबाक बक हंस उड़ाहीं। बहुतक खग प्रबिसहिं तेहि माहीं।।
स्रोत अभिलेख 4.24 · पुस्तक पृ. 704, 705
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने पहाड़की चोटीपर चढ़कर चारों ओर देखा तो पृथ्वीके अंदर एक गुफामें उन्हें एक कौतुक (आश्चर्य) दिखायी दिया। उसके ऊपर चकवे, बगुले और हंस उड़ रहे हैं और बहुत- से पक्षी उसमें प्रवेश कर रहे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 705 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चढ़ि गिरि सिखर चहूँ दिसि देखा। भूमि बिबिर एक कौतुक पेखा।।
English explanation
Hanuman climbed the mountain peak and looked in all four directions. He spotted a curious cave in the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चढ़ि | चढ़कर | having climbed |
| गिरि | पर्वत की | of the mountain |
| सिखर | चोटी | peak |
| चहूँ | चारों | all four |
| दिसि | दिशाओं में | directions |
| देखा | देखा | looked |
| भूमि | धरती में | in the ground |
| बिबिर | गुफा | cave |
| एक | एक | a |
| कौतुक | विचित्र दृश्य | a curious sight |
| पेखा | देखा | saw |
2 चक्रबाक बक हंस उड़ाहीं। बहुतक खग प्रबिसहिं तेहि माहीं।।
English explanation
Ruddy shelducks, herons, and swans were flying about; many birds were entering that cave.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चक्रबाक | चकवे | ruddy shelducks |
| बक | बगुले | herons |
| हंस | हंस | swans |
| उड़ाहीं | उड़ रहे थे | were flying |
| बहुतक | बहुत-से | many |
| खग | पक्षी | birds |
| प्रबिसहिं | प्रवेश करते हैं | enter |
| तेहि | उस गुफा के | that cave |
| माहीं | भीतर | inside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 705
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान · गुफामें तपस्विनीके दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 704, 705
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।