किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कतहुँ होइ निसिचर सैं भेटा। प्रान लेहिं एक एक चपेटा।।
मूल पाठ
कतहुँ होइ निसिचर सैं भेटा। प्रान लेहिं एक एक चपेटा।।
बहु प्रकार गिरि कानन हेरहिं। कोउ मुनि मिलत ताहि सब घेरहिं।।
स्रोत अभिलेख 4.24 · पुस्तक पृ. 704, 705
भावार्थ
मूल पाठ के बादकहीं किसी राक्षससे भेंट हो जाती है, तो एक-एक चपतमें ही उसके प्राण ले लेते हैं। पर्वतों और वनोंको बहुत प्रकारसे खोज रहे हैं। कोई मुनि मिल जाता है तो पता पूछनेके लिये उसे सब घेर लेते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 704 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कतहुँ होइ निसिचर सैं भेटा। प्रान लेहिं एक एक चपेटा।।
English explanation
Whenever the monkeys encountered demons, they killed them with a single slap each.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कतहुँ | कहीं | anywhere |
| होइ | हो जाती | occurred |
| निसिचर | राक्षस | demons |
| सैं | से | with |
| भेटा | भेंट | an encounter |
| प्रान | प्राण | lives |
| लेहिं | ले लेते हैं | take away |
| एक | एक | one |
| एक | प्रत्येक को एक | each |
| चपेटा | थप्पड़ से | with a slap |
2 बहु प्रकार गिरि कानन हेरहिं। कोउ मुनि मिलत ताहि सब घेरहिं।।
English explanation
They search the mountains and forests in many ways; whenever they meet a sage, they all gather around him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| प्रकार | तरीकों से | in ways |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| कानन | वन | forests |
| हेरहिं | खोजते हैं | search |
| कोउ | कोई | any |
| मुनि | मुनि | sage |
| मिलत | मिलता है | is encountered |
| ताहि | उसे | him |
| सब | सभी | all |
| घेरहिं | घेर लेते हैं | gather around |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 704
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान · गुफामें तपस्विनीके दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 704, 705
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।