किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम राम हा राम पुकारी। हमहि देखि दीन्हेउ पट डारी।।
मूल पाठ
राम राम हा राम पुकारी। हमहि देखि दीन्हेउ पट डारी।।
मागा राम तुरत तेहिं दीन्हा। पट उर लाइ सोच अति कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 4.5 · पुस्तक पृ. 685, 686
भावार्थ
मूल पाठ के बादहमें देखकर उन्होंने 'राम! राम! हा राम! पुकारकर वस्त्र गिरा दिया था। श्रीरामजीने उसे माँगा, तब सुग्रीवने तुरंत ही दे दिया। वस्त्रको हृदयसे लगाकर श्रीरामचन्द्रजीने बहुत ही सोच किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 686 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम राम हा राम पुकारी। हमहि देखि दीन्हेउ पट डारी।।
English explanation
She cried, ‘Rama, Rama, alas, Rama!’ Seeing us, she dropped a cloth down.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | हे राम | O Rama |
| राम | हे राम | O Rama |
| हा | हाय | alas |
| राम | हे राम | O Rama |
| पुकारी | पुकारा; पुकार रही थीं | cried out |
| हमहि | हमें | us |
| देखि | देखकर | seeing |
| दीन्हेउ | दे दिया | gave; let fall |
| पट | कपड़ा; वस्त्र | cloth; garment |
| डारी | डालकर; गिराकर | dropping; casting down |
2 मागा राम तुरत तेहिं दीन्हा। पट उर लाइ सोच अति कीन्हा।।
English explanation
Rama asked for the cloth, and Sugriva immediately gave it to him. Holding it to his chest, Rama grieved deeply.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागा | माँगा | asked for |
| राम | राम ने | Rama |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| तेहिं | उसने, सुग्रीव ने | he, Sugriva |
| दीन्हा | दिया | gave |
| पट | कपड़ा | cloth |
| उर | छाती से | to his chest |
| लाइ | लगाकर | holding against |
| सोच | शोक | grief |
| अति | बहुत | deeply; greatly |
| कीन्हा | किया | felt; experienced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 686
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 685, 686
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।